राजस्थान का पहला कंगारू मदर केयर (केएमसी) लाउंज खेरवाड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्थापित किया गया है। यह इकाई मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देने की एक अभिनव पहल होगी। कलेक्टर नमित मेहता और जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी रिया डाबी के निर्देशन में इस पहल का क्रियान्वयन किया गया। खेरवाड़ा एक आकांक्षी ब्लॉक होने के कारण स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी संकेतकों में सुधार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। जिला प्रशासन के निर्देशन में अप्रैल 2025 में केएमसी लाउंज के मॉडल विकास की पहल की गई थी, जिसे अगस्त 2025 तक एक अभिनव मॉडल के रूप में स्थापित किया जाना है। इसके बाद जिला परिषद और सीएमएचओ ने उदयपुर जिले के प्रत्येक सीएचसी और पीएचसी में इसे स्थापित करने के आदेश जारी किए।
केएमसी लाउंज क्या है?
कंगारू मदर केयर यूनिट जीरो सेपरेशन पॉलिसी पर आधारित है। इसके अंतर्गत माँ और शिशु को अलग किए बिना एक साथ रखने की व्यवस्था की गई है। यह दृष्टिकोण न केवल शिशु के जीवन को सुरक्षित बनाता है, बल्कि प्रसवोत्तर अवधि में माताओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ भी प्रदान करता है।इस लाउंज में कम वजन वाले या समय से पहले जन्मे शिशुओं (1800 से 2500 ग्राम) को उनकी माताओं के त्वचा से त्वचा के संपर्क में रखा जाता है। इससे शिशु का तापमान नियंत्रित रहता है। शिशु का वजन भी तेज़ी से बढ़ता है। साथ ही, शिशु को माँ के पास रखने से उन्हें बच्चे की किसी भी प्रकार की चिंता नहीं रहती।
वे कहते हैं...
केएमसी यूनिट खेरवाड़ा सीएचसी को न केवल राजस्थान में बल्कि पूरे देश में एक आदर्श स्वास्थ्य सुविधा के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल नवजात शिशुओं के जीवन को बचाने, मातृ स्वास्थ्य को सशक्त बनाने और सामुदायिक विश्वास को मजबूत करने में मील का पत्थर साबित होगी।यह पहल न केवल मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने में मदद करेगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित करेगी। जिला प्रशासन मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहेगा।
कलेक्टर ने दिल्ली के विज्ञान भवन में दिया था प्रेजेंटेशन
जिला कलेक्टर नमित मेहता ने 17वें सिविल सेवा दिवस पर नई दिल्ली में आकांक्षी ब्लॉक में की गई पहलों का प्रेजेंटेशन दिया था। देश भर के अधिकारियों और विषय विशेषज्ञों ने इसकी सराहना की थी। जिला प्रशासन ने इकाई की स्थापना के दौरान निरंतर निगरानी भी की।
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